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श्री सिद्धबली धाम, उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार शहर में स्थित है | जो की
दिल्ली शहर से मात्र २१० किलोमीटर एवं हरिद्वार से वाया नजीबाबाद होते हुए ८० किलोमीटर
की दूरी पर स्थित है |
नाथ समाज की धारणाओं के अनुसार गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्यों ने यहाँ लम्बे समय तक
तपस्या की, जो की बाद में 'सिद्ध' नाम से प्रसिद्द हुए |इन सिद्धों में कुछ प्रसिद्द
नाम हैं, बाबा सीताराम जी, बाबा गोपाल दास जी, बाबा नारायण दास जी एवं संत सेवादास
जी | फलहारी बाबा ने भी यहाँ वर्षों तक तपस्या की है |
इतिहासकारों के अनुसार संत सिधवा (१४वीं शताब्दी) ने भी यहाँ तपस्या की थी, जिन्हें
की यहाँ सिद्ध के रूप में पूजा जाता है |
श्री सिद्धबली धाम खोह नदी के तट पर स्थित है, और शिवालिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है
| यह मंदिर कुछ वर्ष पूर्व, भूस्खलन के कारण एक तिहाही तक ध्वस्त हो गया था, लेकिन
आश्चर्य जनक रूप से अपने स्थान पर ही टिका रहा, और आज भी शहर के ऊंचाई में अपनी शान
के साथ स्थित है | ऐसी मान्यता है कि जीर्ण अवस्था के समय, स्वयं हनुमान जी ने मंदिर
को अपने कन्धों पर सहारा दिया था |
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